ब्रिडकुल के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग; सुराज सेवा दल ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी( देखे वीडियो)
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देहरादून/हरिद्वार। निर्माण कार्यों में कथित देरी, गुणवत्ता पर सवाल और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर ब्रिडकुल एक बार फिर चर्चा में है। सुराज सेवा दल ने विभाग में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। संगठन की ओर से सचिव को ज्ञापन भेजकर महाप्रबंधक कमल सैनी के कार्यकाल में आवंटित निर्माण कार्यों की जांच कराने और अनियमितताएं सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

सुराज सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच देहरादून यूनिट को आवंटित करीब 19 निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे नहीं होने का मामला गंभीर है। उन्होंने मांग की कि संबंधित परियोजनाओं की स्वीकृत लागत, कार्यादेश, निर्धारित एवं वास्तविक पूर्णता तिथि और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्यों में देरी के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।

कई प्रमुख निर्माण परियोजनाओं की जांच की मांग
ज्ञापन में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बहादुरपुर जट, आईटीडीए के निर्माणाधीन भवन, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज मालदेवता के गर्ल्स हॉस्टल और डोईवाला स्थित परीक्षा भवन सहित कई निर्माण परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। संगठन ने इन कार्यों की मौजूदा स्थिति, लागत और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
दल का कहना है कि सरकारी निर्माण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। जनता के धन से होने वाले कार्य निर्धारित मानकों और तय समयसीमा के अनुरूप पूरे होने चाहिए। यदि किसी परियोजना में देरी या अनियमितता हुई है, तो उसके कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।

टेंडर से भुगतान तक पूरे रिकॉर्ड का ऑडिट कराने की मांग
सुराज सेवा दल ने निर्माण कार्यों की जांच को केवल मौके पर निरीक्षण तक सीमित न रखने की मांग की है। ज्ञापन में वित्तीय स्वीकृतियों, निविदा दस्तावेजों, माप पुस्तिकाओं, बिलों, भुगतान विवरण और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्टों का विशेष ऑडिट कराने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा श्रीनगर, हल्द्वानी और पिथौरागढ़ यूनिटों में संचालित तथा पूर्ण घोषित निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। संगठन ने कहा कि जांच के दौरान निर्माण सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि कार्य स्वीकृत डिजाइन और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।
गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई और वसूली की मांग
ज्ञापन में निविदा प्रक्रिया, ठेकेदारों की पात्रता, चयन के मानकों और कार्य आवंटन की प्रक्रिया की भी बारीकी से पड़ताल कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन या निर्माण गुणवत्ता में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही, यदि सरकारी धन को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों से नियमानुसार वसूली सुनिश्चित की जाए। दल ने जांच पूरी होने तक संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
सुराज सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने कहा कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उचित समय के भीतर शिकायत पर कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा।
इस दौरान विजेंद्र, वीरेंद्र, पाल सिंह डिंपी, अतीश मिश्रा, अजय मौर्य, पूजा नेगी, सुनीता साहनी, भूमिका, नशरीन, राखी, शिवम, संगीता, इंतजार, आलिम, नौशाद, अजय, नरेंद्र, नितिन कटारिया, अमित अग्रवाल और जावेद समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।