‘जागृति’ के दिव्य प्रकाश और एकत्व के संदेश से आलोकित हुआ 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम
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हरिद्वार । 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन आध्यात्मिक चेतना, प्रेम, सद्भावना और एकत्व के संदेश से ओतप्रोत रहा। समागम में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने सत्संग में भाग लेकर आध्यात्मिक विचारों और मानवता के संदेश को आत्मसात किया। इस अवसर पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने ‘जागृति’ के महत्व को समझाते हुए कहा कि आध्यात्मिक जागृति ही वास्तविक जीवन का आधार है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि जागरूकता केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहना आवश्यक है। जब मनुष्य अपने विचारों और आचरण के प्रति सजग होता है, तभी वह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर सच्चे आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
चार दिवसीय संत समागम में विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं का संगम प्रेम, सौहार्द, सद्भावना और विश्वबंधुत्व की अनुपम मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। समागम स्थल पर भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और आपसी प्रेम का वातावरण श्रद्धालुओं को मानवता के व्यापक संदेश से जोड़ रहा है।
सच्ची भक्ति का आधार प्रेम, विनम्रता और सत्य
सतगुरु माता जी ने भक्ति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि सच्ची भक्ति किसी बाहरी पहचान की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने से सार्थक होती है। समय के साथ जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन सत्य को जीवन का आधार बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने सत्संग की सार्थकता को जीवन में प्राप्त शिक्षाओं के व्यवहारिक अनुपालन से जोड़ते हुए आत्मसुधार की भावना निरंतर बनाए रखने का संदेश दिया। आध्यात्मिक जागृति तभी वास्तविक रूप लेती है, जब मनुष्य अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाकर दूसरों के प्रति प्रेम, सम्मान और सद्भाव का भाव रखता है।

सेवा, सुमिरन और सत्संग से जागृत होता है आध्यात्मिक प्रकाश
सतगुरु माता जी के संबोधन से पूर्व निरंकारी राजपिता रमित जी ने दृष्टिहीन व्यक्ति और लालटेन के उदाहरण के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन की महत्ता समझाई। उन्होंने संदेश दिया कि केवल गुरमुख का बाहरी स्वरूप धारण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में ब्रह्मज्ञान, प्रेम और समर्पण का प्रकाश निरंतर जागृत रहना चाहिए।
उन्होंने सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन के विचारों, भावनाओं और आचरण को निखारने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। इन मूल्यों को अपनाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है और समाज में प्रेम एवं मानवता की भावना को मजबूत कर सकता है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से किया सम्मानित
समागम के अवसर पर चिश्ती फाउंडेशन की ओर से सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
निरंकारी प्रदर्शनी बनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में आधुनिक तकनीक, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और रचनात्मक प्रस्तुतियों से सुसज्जित निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और विभिन्न आयु वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनी को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है—मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी और संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (एसएनसीएफ) प्रदर्शनी।

मुख्य प्रदर्शनी: मिशन की आध्यात्मिक यात्रा का चित्रण
मुख्य प्रदर्शनी में संत निरंकारी मिशन के इतिहास, उसकी आध्यात्मिक यात्रा तथा सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी की मानव कल्याण यात्राओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। तीन विशेष मॉडलों के माध्यम से समागम के मुख्य विषय ‘जागृति’ को दर्शाया गया है। इनके जरिए श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक समझ और सकारात्मक जीवन-दृष्टि अपनाने की प्रेरणा दी जा रही है।
बाल प्रदर्शनी: बच्चों में संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास
बाल प्रदर्शनी बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास पर केंद्रित है। रोचक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवनोपयोगी शिक्षाएं अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन में स्थान दे सकें।
एसएनसीएफ प्रदर्शनी: निःस्वार्थ सेवा और समाज कल्याण का संदेश
संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन की प्रदर्शनी में मिशन की सामाजिक कल्याण और समाज सुधार से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें रक्तदान, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक जागरूकता तथा सादे और सामूहिक विवाह जैसे प्रयासों के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया है।
जागृति के संदेश के साथ आगे बढ़ रहा संत समागम
79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, आत्मसुधार और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देकर संपन्न हुआ। समागम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि आध्यात्मिक जागृति केवल विचारों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, सेवा भावना और दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण में भी दिखाई दे। प्रेम, एकत्व और सद्भावना के माध्यम से ही एक बेहतर समाज और विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूत बनाया जा सकता है।