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धर्म

सतगुरु के दिव्य संदेश से आलोकित हुई चेतना, 79वें निरंकारी संत समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

✍ Javed Ansari 🕒 26 Oct 2026, 06:48 PM
सतगुरु के दिव्य संदेश से आलोकित हुई चेतना, 79वें निरंकारी संत समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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समालखा (हरियाणा)। 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन समालखा की पावन धरा पर भक्ति, प्रेम, श्रद्धा और मानवता का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचनों के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति, परमात्मा के प्रति अटूट विश्वास और निष्काम प्रेम का संदेश दिया। सतगुरु के पावन दर्शन और उनके प्रेरणादायी विचारों से श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। समूचा समागम स्थल भक्ति, सेवा, समर्पण और विश्वबंधुत्व की भावना से सराबोर रहा।

हर परिस्थिति में परमात्मा से जुड़ाव ही सच्ची भक्ति

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही वास्तविक जागृति है। आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव और प्रत्येक पल निराकार प्रभु की उपस्थिति का अनुभव करना ही आध्यात्मिक जीवन का मूल सार है। उन्होंने समझाया कि परमात्मा अटल सत्य है, जबकि मनुष्य की इच्छाएं, परिस्थितियां और जीवन की चुनौतियां समय के साथ बदलती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में आस्था बनाए रखना आसान होता है, लेकिन प्रतिकूल समय में भी विश्वास और समर्पण कायम रखना ही सच्ची भक्ति की पहचान है। ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति केवल विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।

सतगुरु माता जी ने यह भी संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य और भावनाओं का आत्ममंथन करना चाहिए। यह देखना आवश्यक है कि हमारा प्रयास वास्तव में समाज की भलाई के लिए है या उसके पीछे अहंकार, स्वार्थ और दिखावे की भावना छिपी है। विचारों में भिन्नता होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा के अंश को देखकर उसे स्वीकार करना और उसके प्रति प्रेम रखना ही निष्काम प्रेम की सच्ची पहचान है।

राजपिता रमित जी ने दिया सकारात्मक सोच और आत्ममंथन का संदेश

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों से पूर्व निरंकारी राजपिता रमित जी ने भी श्रद्धालुओं को जागरूकता और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में जिन परिस्थितियों को बदला जा सकता है, उनमें सकारात्मक प्रयास करने चाहिए, जबकि जिन परिस्थितियों को बदलना संभव न हो, उन्हें सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

राजपिता जी ने कहा कि मनुष्य संसार की आवश्यकताओं और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति तो सजग रहता है, लेकिन कई बार अपनी आत्मा की वास्तविक आवश्यकता को भूल जाता है। परमात्मा के प्रेम और उसकी सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना तथा सच्ची जिज्ञासा, श्रद्धा और समर्पण के साथ जीवन जीना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्राप्त किया सतगुरु का आशीर्वाद

समागम के इस पावन अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही कई पार्षदों और विधायकों ने भी सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के दर्शन कर उनका आशीष प्राप्त किया।

दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं

समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजन स्थल के सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई, जिससे उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में आसानी हो। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की सुविधाओं के साथ कार्यक्रमों को देखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु को समागम में सहजता से शामिल होने और सतगुरु के पावन दर्शन का लाभ प्राप्त करने का अवसर देना रहा।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यापक इंतजाम, 120 बिस्तरों का अस्थायी अस्पताल तैयार

समागम में मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से श्रद्धालुओं के लिए व्यापक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। आयोजन स्थल पर 8 एलोपैथिक और 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी तथा 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए। इसके अतिरिक्त, 15 आईसीयू सुविधाओं से युक्त 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल तैयार किया गया।

आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। इनमें 15 वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस शामिल होने की जानकारी दी गई है। इससे जरूरतमंद श्रद्धालुओं को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।

समागम के दौरान आयोजित कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत और विदेशों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में उपचार और देखभाल से हजारों लोगों को लाभ मिला। इसके साथ ही ईएनटी, नेत्र रोग, बाल रोग, दंत चिकित्सा और मनोरोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमों ने श्रद्धालुओं को चिकित्सा परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया।

चार स्थानों पर लंगर, 22 कैंटीनों में रियायती दरों पर खाद्य सामग्री

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भोजन और पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई। परिसर में चार स्थानों पर सामुदायिक लंगर संचालित किए गए, जहां लाखों श्रद्धालुओं को दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते श्रद्धालुओं के बीच समानता, सेवा और भाईचारे की भावना दिखाई दी।

इसके अतिरिक्त, परिसर में 22 कैंटीनों के माध्यम से रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी और मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। इन व्यवस्थाओं ने न केवल श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा किया, बल्कि सेवा, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत किया।

प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश दे रहा निरंकारी संत समागम

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का संदेश केवल आध्यात्मिक प्रवचनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा, चिकित्सा, भोजन और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं में भी इसकी झलक देखने को मिली। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेश ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे जीवन की हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रति विश्वास बनाए रखें, अपने आचरण में प्रेम और विनम्रता अपनाएं तथा समाज में मानवता, सद्भाव और एकत्व की भावना को मजबूत करें।

समागम ने यह संदेश दिया कि सच्ची जागृति वही है, जो मनुष्य के विचारों को सकारात्मक बनाए, व्यवहार में प्रेम उत्पन्न करे और उसे दूसरों की सेवा के लिए प्रेरित करे।

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