उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर गरमाई सियासत, सचिवालय कूच के दौरान सुराज सेवा दल के कार्यकर्ता हिरासत में(देखे वीडियो)
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देहरादून। उत्तराखंड में लंबित विजिलेंस जांचों, भ्रष्टाचार के मामलों और कथित माफियागिरी के खिलाफ सुराज सेवा दल का आंदोलन गुरुवार को उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब सचिवालय के बाहर प्रस्तावित भूख हड़ताल से पहले ही पुलिस ने संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को रोकते हुए हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी पुलिस को चकमा देकर सचिवालय पहुंच गए और वहां सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। बाद में उन्हें कैंट थाने ले जाया गया, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं को पुलिस लाइन भेज दिया गया।

पुलिस की घेराबंदी के बावजूद सचिवालय पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष
गुरुवार सुबह सुराज सेवा दल के सैकड़ों कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय में एकत्र हुए, जहां आंदोलन की रणनीति तय की गई। संगठन ने सचिवालय के बाहर भूख हड़ताल कर प्रदेश में लंबित विजिलेंस जांचों के शीघ्र निस्तारण, भ्रष्टाचार के आरोपियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा गृह विभाग की भूमिका स्पष्ट करने की मांग उठाने का निर्णय लिया।

जैसे ही कार्यकर्ता सचिवालय की ओर बढ़े, पुलिस ने कार्यालय के बाहर घेराबंदी कर उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी पुलिस की निगरानी से निकलकर सचिवालय पहुंच गए और वहीं सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कुछ देर बाद प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र सिंह बिष्ट, जिलाध्यक्ष सुमित अग्रवाल और अन्य कार्यकर्ता भी सचिवालय पहुंच गए।

हिरासत के बाद पुलिस लाइन में शुरू हुई भूख हड़ताल
पुलिस ने रमेश जोशी को हिरासत में लेकर कैंट थाने भेज दिया, जबकि देवेन्द्र सिंह बिष्ट, सुमित अग्रवाल सहित अन्य कार्यकर्ताओं को पुलिस लाइन ले जाया गया। पुलिस लाइन पहुंचने के बाद जिलाध्यक्ष सुमित अग्रवाल वहीं भूख हड़ताल पर बैठ गए।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। उनका आरोप था कि वर्षों से लंबित विजिलेंस जांचों को जानबूझकर निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया जा रहा, जिससे दोषियों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि इन मामलों में कार्रवाई आखिर कब होगी।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता भ्रष्टाचार, माफियागिरी और सत्ता के कथित संरक्षण से परेशान है। उनका कहना था कि वर्षों से लंबित विजिलेंस जांचों का निस्तारण न होना जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि सभी लंबित जांचों को शीघ्र पूरा कर उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज को पुलिस बल के माध्यम से दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और जब तक निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं होगी, संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सुराज सेवा दल ने मांग की कि प्रदेश में लंबित सभी विजिलेंस जांचों का निष्कर्ष तत्काल सार्वजनिक किया जाए, भ्रष्टाचार के आरोपियों एवं माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा गृह विभाग अपनी भूमिका स्पष्ट करे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को पूरे उत्तराखंड में और व्यापक रूप दिया जाएगा।
ये रहे मौजूद
आंदोलन के दौरान रमेश जोशी, देवेन्द्र सिंह बिष्ट, सुमित अग्रवाल, कमल धामी, कावेरी जोशी, अमित अग्रवाल, राजेश थापा, वीरेंद्र सिंह, हिमांशु धामी, नवीन, मोनू, दिव्यांश, पूजा नेगी, संगीता, मोनिका, नसरीन, सुमन, लक्ष्मी, गीता सहित बड़ी संख्या में सुराज सेवा दल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।