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उत्तराखंड

"सस्ते प्लॉट का सपना कहीं पड़ न जाए भारी, कृषि भूमि पर धड़ल्ले से काटी जा रही कॉलोनियां?

✍ Javed Ansari 🕒 22 Sep 2026, 03:17 PM
"सस्ते प्लॉट का सपना कहीं पड़ न जाए भारी, कृषि भूमि पर धड़ल्ले से काटी जा रही कॉलोनियां?

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रुड़की। शहर और आसपास के इलाकों में कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर कॉलोनियां विकसित किए जाने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। संबंधित विभाग समय-समय पर लोगों को अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से सावधान करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर नियमों को लेकर सवालों के घेरे में आने वाली प्लॉटिंग गतिविधियां जारी होने की बात सामने आ रही है। ताजा मामला मतलबपुर-सुनहेरा मार्ग से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कृषि भूमि पर कथित तौर पर बिना विभागीय लेआउट स्वीकृति के कॉलोनी विकसित किए जाने और प्लॉट बेचे जाने की चर्चा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, उक्त क्षेत्र में कृषि भूमि पर प्लॉट काटे गए हैं और इनमें से कई भूखंडों को खरीदारों को बेचने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, संबंधित भूमि और प्रस्तावित कॉलोनी का लेआउट नियमानुसार स्वीकृत है या नहीं, इसकी वास्तविक स्थिति विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित विभाग की ओर से स्थल और दस्तावेजों की जांच कराया जाना जरूरी माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भूमि का भू-उपयोग कृषि है और उस पर आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो इसके लिए जरूरी विभागीय अनुमति और स्वीकृत लेआउट की स्थिति क्या है। नियमों के तहत किसी भी जमीन में प्लॉटिंग या विकास कार्य से पहले संबंधित स्वीकृतियों और भूमि की स्थिति की जानकारी लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके बावजूद यदि बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए प्लॉट बेचे जा रहे हैं, तो इससे भविष्य में खरीदारों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

विभाग की ओर से भी समय-समय पर आम लोगों को सलाह दी जाती रही है कि किसी कॉलोनी में भूखंड खरीदने से पहले उसके लेआउट, स्वीकृति और संबंधित अभिलेखों की जांच जरूर कर लें। अक्सर कम कीमत या आकर्षक सुविधाओं के नाम पर लोग जल्दबाजी में जमीन खरीद लेते हैं और बाद में विकास कार्य, रास्ते, मूलभूत सुविधाओं या अन्य विभागीय प्रक्रियाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मतलबपुर-सुनहेरा मार्ग पर सामने आए इस मामले में भी संभावित खरीदारों के हित में यह जरूरी है कि कॉलोनी की वैधता और संबंधित स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट हो।

स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जहां छोटे निर्माण कार्यों को लेकर विभागीय स्तर पर नियम-कायदों की जानकारी और कार्रवाई की प्रक्रिया सामने आती है, वहीं बड़े स्तर पर विकसित की जा रही कथित अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी। 

अब देखना यह होगा कि क्या एचआरडीए इस मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच करता है या नहीं। यदि जांच में लेआउट स्वीकृति या अन्य जरूरी अनुमतियों में अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल, मामला जांच और विभागीय कार्रवाई का विषय है, लेकिन इसने एक बार फिर शहर के आसपास तेजी से बढ़ रही प्लॉटिंग गतिविधियों और जमीन खरीदने वाले लोगों की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरीदारों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी प्लॉट की खरीद से पहले उसकी विभागीय स्थिति और स्वीकृतियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूर करें।

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