रक्षाबंधन पर मुस्लिम युवाओं ने पेश की भाईचारे की मिसाल, हिंदू बहनों के लिए ई-रिक्शा सेवा की निःशुल्क
अब खबर पढ़ें ही नहीं, सुनें भी — यहां क्लिक करें। 👆🏻
हरिद्वार। रक्षाबंधन पर्व पर हरिद्वार के लक्सर रोड पर दो मुस्लिम युवाओं ने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश कर लोगों का दिल जीत लिया। दोनों युवाओं ने रक्षाबंधन के दिन हिंदू बहनों के लिए पूरे दिन ई-रिक्शा में बिना किसी किराए के आने-जाने की सुविधा देने का निर्णय लिया।

इस सराहनीय पहल को समाज तक पहुंचाने के लिए दोनों युवाओं ने अपनी ई-रिक्शा के आगे और पीछे फ्लेक्स लगाकर भावनात्मक संदेश भी दिया। फ्लेक्स पर लिखा गया— “कद्र करो बहनो की, कोई फर्क नहीं पड़ता, अपनों की हो या बेगानों की।” इस संदेश ने भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ आपसी प्रेम, सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द का भी संदेश दिया।

बताया गया कि हसरत ने इस पहल की तैयारी कई दिन पहले ही शुरू कर दी थी। उनका उद्देश्य रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समाज में भाईचारे और इंसानियत का संदेश देना था। पहल के दौरान दोनों युवाओं ने बहनों को अपना मानते हुए उनके आवागमन का किराया नहीं लेने का निर्णय लिया।

‘हरिद्वार की गूंज’ ने किया युवाओं का सम्मान
दोनों युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए ‘हरिद्वार की गूंज’ राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र एवं HKG पोर्टल के सह-संपादक गगन शर्मा ने उनका माला पहनाकर स्वागत किया और उनके प्रयास को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

गगन शर्मा ने कहा कि आज देश और समाज को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो धर्म और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे के लिए सोचें और उसे अपने आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की तरह हमें भी मानवता के हित में कार्य करने की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी हैं। मुस्लिम युवाओं की यह पहल समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर पेश करती है।
दोनों युवाओं की इस पहल की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की और कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द की बड़ी मिसाल बनते हैं।