उर्स मेले में बिजली के नाम पर दुकानदारों से हजारों की वसूली का आरोप, गरीब दुकानदार बोले—‘कमाई से पहले खर्च का बोझ’
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पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स मेले में दुकान लगाकर परिवार की रोजी-रोटी चलाने पहुंचे छोटे और बाहरी दुकानदार इन दिनों बिजली के कथित भारी शुल्क से परेशान हैं। दुकानदारों का आरोप है कि अस्थायी बाजार में बिजली कनेक्शन देने के नाम पर उनसे मनमाने तरीके से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। एक दुकानदार से करीब 7,500 रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है।

दुकानदारों का कहना है कि उर्स मेले में दुकान लगाने के लिए उन्हें पहले ही दुकान का किराया, आने-जाने, सामान ढुलाई और रहने-खाने समेत कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। ऐसे में बिजली के नाम पर अतिरिक्त हजारों रुपये की वसूली उनके लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन गई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि वे उर्स मेले में बड़ी कमाई की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यदि कमाई का बड़ा हिस्सा ही व्यवस्थाओं के नाम पर खर्च हो जाए तो उनके सामने परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

पिछले साल 500 रुपये प्रति बल्ब, इस बार हजारों का बोझ
दुकानदारों के मुताबिक पिछले उर्स मेले में बिजली के लिए प्रति बल्ब करीब 500 रुपये शुल्क लिया जाता था। आरोप है कि इस बार बिजली व्यवस्था संभाल रहे ठेकेदार की ओर से यूनिट/किलोवाट के हिसाब से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि इतनी अधिक राशि वसूले जाने की जानकारी उन्हें पहले से स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी।

दुकानदारों ने सवाल उठाया कि यदि बिजली व्यवस्था के लिए निर्धारित शुल्क है तो उसकी स्पष्ट दर सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और छोटे दुकानदारों से इतनी बड़ी रकम किस आधार पर ली जा रही है?
‘हम गरीब लोग हैं, बिजली के नाम पर इतना खर्च कैसे उठाएं?’
मेले में दुकान लगाने वाले दुकानदारों का कहना है कि वे यहां व्यापार करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं। कई दुकानदार छोटे स्तर पर सामान बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उनका कहना है कि बिजली की जरूरत से कोई इनकार नहीं है, लेकिन उसका शुल्क ऐसा होना चाहिए जिसे छोटे दुकानदार भी आसानी से वहन कर सकें।

दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली शुल्क की पूरी व्यवस्था की जांच कर स्पष्ट और उचित दर निर्धारित की जाए, ताकि किसी भी दुकानदार से मनमाने तरीके से वसूली न हो।

ठेकेदार बोला—करीब 10 लाख में लिया है बिजली व्यवस्था का ठेका
वहीं बिजली ठेकेदार का कहना है कि उसने दरगाह से करीब 10 लाख रुपये में बिजली व्यवस्था का ठेका लिया है। ठेकेदार के अनुसार वह 7,000 रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से बिजली की सप्लाई कर रहा है। ठेकेदार ने यह भी कहा कि जिसे बिजली शुल्क को लेकर आपत्ति है, वह बिजली न ले।
मेला अधिकारी ने कहा—नियमों के खिलाफ वसूली मिली तो होगी कार्रवाई
मामले को लेकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की एवं मेला अधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ ने कहा कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में सामने आता है कि ठेकेदार द्वारा निर्धारित नियमों के विपरीत या मनमाने तरीके से दुकानदारों से वसूली की जा रही है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उर्स में दूर-दराज से आकर अपनी छोटी-छोटी दुकानों के जरिए परिवार की रोजी-रोटी चलाने वाले इन दुकानदारों को बिजली के नाम पर कितनी राहत मिलती है। दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर मनमानी वसूली पर रोक लगाए और गरीब दुकानदारों के लिए उचित बिजली शुल्क तय करे।