धनौरी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी, सतत विकास में गणित की भूमिका पर जोर
पिरान कलियर/धनौरी: धनौरी पी.जी. कॉलेज में गणित विभाग द्वारा आयोजित “उत्तराखंड के सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति” विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन का तृतीय सत्र बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया। सत्र का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) विजय कुमार ने किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता प्रो. गिरीश शर्मा (एमसीए विभाग, भाई परमानंद इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज) और विशिष्ट वक्ता डॉ. गौरव वार्ष्णेय (एसोसिएट प्रोफेसर, गणित विभाग, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय) को स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉ. सूरज पाल सिंह (सहायक आचार्य, गणित विभाग, राजकीय डिग्री कॉलेज, बाजपुर) को भी सम्मानित किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो. गिरीश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान दौर में गणित केवल एक विषय नहीं, बल्कि डेटा माइनिंग और विश्लेषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने का मजबूत साधन बन चुका है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में गणित की अहम भूमिका है।

वहीं, विशिष्ट वक्ता डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने “रोगग्रस्त धमनियों में रक्त प्रवाह और दवा वितरण के लिए गणितीय मॉडलिंग” विषय पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा कि आज के समय में शोध कार्यों को बहुविषयी दृष्टिकोण के साथ करना बेहद जरूरी है। उन्होंने गणितीय मॉडलिंग के मूल सिद्धांतों—क्यों, क्या प्राप्त हुआ, क्या दिया गया, धारणा और कैसे—को सरल तरीके से समझाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सीमा पंत और डॉ. कृष्णन बिष्ट ने संयुक्त रूप से किया। अंत में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अंकुर कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।





