रुड़की में ऐतिहासिक पहल: क्वांटम यूनिवर्सिटी और सऊदी की किंग फहद यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू

रुड़की में ऐतिहासिक पहल: क्वांटम यूनिवर्सिटी और सऊदी की किंग फहद यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू

रुड़की । उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षिक उपलब्धि सामने आई है। क्वांटम यूनिवर्सिटी ने सऊदी अरब के प्रतिष्ठित किंग फहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड मिनरल्स (KFUPM), दहरान के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर राज्य की पहली यूनिवर्सिटी बनने का गौरव हासिल किया है, जिसने इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किया है।


यह समझौता भारत और सऊदी अरब के बीच शिक्षा, ऊर्जा, तकनीक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। दोनों देशों की नीतियों—भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सऊदी अरब की विजन 2030—से प्रेरित यह साझेदारी उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीयकरण, कौशल विकास और शोध को बढ़ावा देगी।


क्वांटम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार ने बताया कि इस एमओयू के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में विशेष कार्य होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को जल्द ही रिसर्च ग्रांट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर मिलेंगे।
किंग फहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड मिनरल्स को उद्योग आधारित शिक्षा, अत्याधुनिक शोध और नवाचार के लिए वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। वहीं क्वांटम यूनिवर्सिटी अपनी मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा प्रणाली और उद्योग से जुड़े पाठ्यक्रमों के लिए जानी जाती है, जो छात्रों को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष बना रही है।


समारोह के दौरान किंग फहद यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल में प्रो. सुलेमान सालेह अल-होमिदान, डॉ. अम्मार मोहम्मद आदम, मुदस्सिर हसन खान और अब्दुल समद शामिल रहे। वहीं क्वांटम यूनिवर्सिटी की ओर से कुलाध्यक्ष अजय गोयल, शोभित गोयल, कुलपति प्रो. विवेक कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
इससे पहले श्यामजी ऑडिटोरियम में आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में करीब 400 छात्रों ने भाग लिया, जहां उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय समझौते से मिलने वाले अवसरों की जानकारी दी गई।
यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऊर्जा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में संयुक्त शोध और वैश्विक ज्ञान सृजन को बढ़ावा मिलेगा।