गंगनहर में मिले अज्ञात शव की तीन दिन बाद हुई पहचान
हरिद्वार। ज्वालापुर पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए गंगनहर में मिले एक अज्ञात शव की पहचान कर उसे परिजनों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है। महज एक टूटे और क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन के सहारे पुलिस ने तीन दिन की अथक मेहनत के बाद मृतक की पहचान कर परिजनों को अंतिम दर्शन का अवसर दिलाया। पुलिस की इस कार्यवाही की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।
पुलिस मुख्यालय स्तर से चलाए जा रहे अज्ञात शवों की शिनाख्त अभियान के तहत एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर हरिद्वार पुलिस लगातार गंभीरता से कार्य कर रही है। इसी क्रम में कोतवाली ज्वालापुर पुलिस ने एक ऐसे शव की पहचान कर दिखाई, जिसके पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज मौजूद नहीं था।
जटवाड़ा पुल के पास मिला था शव
जानकारी के अनुसार बीती 04 मई को जटवाड़ा पुल गंगनहर रेगुलेटर पुल के पास एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ था। पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद शव को जिला अस्पताल हरिद्वार की मोर्चरी में रखवाया गया, लेकिन पहचान नहीं होने से मामला चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
टूटे मोबाइल फोन से खुला पहचान का रास्ता
प्रभारी निरीक्षक चंद्रभान सिंह अधिकारी के नेतृत्व में ज्वालापुर पुलिस टीम लगातार प्रयास करती रही। तलाशी के दौरान मृतक की जेब से एक पुराना और टूटा हुआ मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें एक सिम कार्ड लगा था। पुलिसकर्मियों ने सिम को सक्रिय कर जानकारी जुटाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन शुरुआती कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इसके बावजूद पुलिस ने उम्मीद नहीं छोड़ी और सिम को लगातार एक्टिव रखा।
आखिरकार 06 मई को उस नंबर पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने बताया कि यह नंबर “बिट्टू” नाम के व्यक्ति का है, जो उसके यहां कारपेंटर का कार्य करता था। उसके द्वारा दिए गए दूसरे नंबर पर संपर्क करने पर मृतक की पुत्री हंसा देवी से बात हुई। उन्होंने बताया कि उनके पिता ताराचंद उर्फ बिट्टू निवासी राजगढ़ मंडी, हिमाचल प्रदेश, कई दिनों से लापता थे और नौकरी की तलाश में घर से निकले थे।
व्हाट्सएप फोटो से हुई पुष्टि
पुलिस ने व्हाट्सएप के माध्यम से मृतक के फोटो परिजनों को भेजे, जिन्हें देखकर उन्होंने अपने पिता के रूप में पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मृतक का पुत्र नवीन कुमार हरिद्वार पहुंचा और मोर्चरी में शव देखकर पहचान सुनिश्चित की। पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
परिजनों ने जताया आभार
भावुक परिजनों ने उत्तराखण्ड पुलिस और ज्वालापुर पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि यदि पुलिस इतनी संवेदनशीलता और मेहनत से प्रयास नहीं करती, तो उन्हें अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हो पाते।
शिनाख्त अभियान में अपर उपनिरीक्षक कमला चौहान और कांस्टेबल मनोज डोभाल की भूमिका भी सराहनीय रही।






