सच, साहस और उसूलों की विरासत को नमन—रुड़की में भावभीनी श्रद्धांजलि के बीच याद किए गए पत्रकारिता के पुरोधा राव शाहनवाज खां..

सच, साहस और उसूलों की विरासत को नमन—रुड़की में भावभीनी श्रद्धांजलि के बीच याद किए गए पत्रकारिता के पुरोधा राव शाहनवाज खां..

रुड़की! पत्रकारिता को लाभ या पद का साधन नहीं, बल्कि सच के लिए संघर्ष का माध्यम मानने वाले, निडरता और ईमानदारी की मिसाल रहे स्वर्गीय राव शाहनवाज खां की स्मृति में रुड़की में आयोजित श्रद्धांजलि सभा भावनाओं से सराबोर रही। चार दशकों तक बेबाक कलम से सत्ता से सवाल पूछने और समाज के हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज़ बनने वाले इस कलम के सिपाही को याद करते हुए सभागार में मौजूद हर शख्स की आंखें नम दिखीं।
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सैनी और तपन सुशील के संयोजन में आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राजनीति, समाज और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत कर स्वर्गीय राव शाहनवाज खां के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। जैसे ही श्रद्धांजलि का क्रम शुरू हुआ, पूरा वातावरण गमगीन हो गया और हर चेहरा उनके संघर्ष, निडर लेखनी और सिद्धांतों को याद करता नजर आया।


श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सैनी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि राव शाहनवाज खां केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा थे। उन्होंने अपने साथ बिताए संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि कई बार सत्ता का दबाव आया, मुश्किल हालात बने, लेकिन राव शाहनवाज खां कभी नहीं झुके। सच के साथ खड़े रहने का साहस उन्होंने हर हाल में दिखाया। अपने शब्दों को पूरा करते-करते सुभाष सैनी की आवाज़ भर्रा गई और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिसे देख सभागार में मौजूद कई लोग खुद को रोक नहीं पाए।


वरिष्ठ पत्रकार तपन सुशील ने कहा कि राव शाहनवाज खां का जीवन नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक जीवंत पाठशाला है। वे विचारों में स्पष्ट, सोच में गहरे और व्यवहार में अत्यंत सरल व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि राव शाहनवाज खां जैसी शख्सियत सदियों में जन्म लेती है और उनके सिद्धांत हमेशा पत्रकारिता का मार्गदर्शन करते रहेंगे।


वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राव आफाक अली ने कहा कि राव शाहनवाज खां ने पत्रकारिता को गरिमा और सम्मान दिलाया। वे समाज के हर वर्ग की पीड़ा को समझते थे और बिना किसी भय के उसे सामने लाते थे। वहीं, रुड़की प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष संदीप तोमर ने उन्हें पत्रकारिता का असली प्रहरी बताते हुए कहा कि उन्होंने सिखाया कि खबर लिखते समय केवल सच को देखा जाना चाहिए, न कि सत्ता या पद को।


वरिष्ठ पत्रकार अमजद उस्मानी ने कहा कि राव शाहनवाज खां ने अपनी कलम को कभी बिकने नहीं दिया और कलम से इंसाफ किया, यही उनकी सबसे बड़ी पहचान रही। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलीम खान ने कहा कि भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच और विचार आज भी जीवित हैं। उत्तराखंड सरकार में दर्जाधारी मंत्री देशराज कर्णवाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राव शाहनवाज खां ने समाज के हर तबके की आवाज़ को मंच दिया और उनका योगदान अविस्मरणीय है।


वरिष्ठ समाजसेवी सुभाष सरीन ने उन्हें समाज की आवाज़ बताते हुए कहा कि वे सिर्फ पत्रकार नहीं थे, बल्कि सामाजिक सरोकारों के सच्चे प्रतिनिधि थे।

इस अवसर पर दीपक मिश्रा, प्रिंस शर्मा, चौ. अनवर राणा, रियाज कुरैशी, प्रवेज़ आलम, बबलू सैनी, वीरेंद्र चौधरी, हरिओम गिरी, मुनव्वर अली साबरी, अहमद भारती, रियाज पुंडीर, आरिफ नियाजी, असलम अंसारी, संदीप कश्यप, संदीप चौधरी सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों और गणमान्य लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।