हरिद्वार में पांच स्थानों पर आपदा मॉक ड्रिल, बाढ़ और भूस्खलन जैसे हालात में परखी गई तैयारियां
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हरिद्वार। मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को हरिद्वार जनपद की तीन तहसीलों के पांच अलग-अलग स्थानों पर व्यापक आपदा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस अभ्यास में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और राहत-बचाव क्षमता का परीक्षण किया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान हरकी पैड़ी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं के डूबने, श्यामपुर कांगड़ी में बाढ़ का पानी आबादी में घुसने, भीमगौड़ा रेलवे टनल के पास भारी बारिश के कारण पत्थर गिरने से रेलवे ट्रैक बाधित होने, लक्सर के गंगदासपुर में तटबंध टूटने तथा शिवपुरी गांव में बाढ़ से जलभराव की काल्पनिक परिस्थितियां बनाई गईं। इन सभी स्थानों पर सर्च एवं रेस्क्यू अभियान चलाकर राहत कार्यों का सफल अभ्यास किया गया।

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को सुबह 11 बजे के बाद घटनाओं की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय कर दिया गया। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पी.आर. चौहान ने जिला स्तर से राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की, जबकि संबंधित उपजिलाधिकारियों ने इंसीडेंट कमांडर के रूप में मोर्चा संभाला।

स्टेजिंग एरिया से एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य, राजस्व, होमगार्ड, पीआरडी और लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों की टीमें आवश्यक संसाधनों के साथ घटनास्थलों पर पहुंचीं। टीमों ने निर्धारित एसओपी के अनुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को राहत केंद्रों एवं अस्पतालों तक पहुंचाने का अभ्यास किया।

अभ्यास के दौरान हरकी पैड़ी पर 16 लोगों को डूबने से बचाने, भीमगौड़ा रेलवे टनल हादसे में घायल 9 लोगों को प्राथमिक उपचार देने तथा शिवपुरी गांव में बढ़े जलस्तर में फंसे 30 लोगों को सुरक्षित निकालने का सफल प्रदर्शन किया गया।
मॉक ड्रिल की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि सभी विभागों और एजेंसियों ने निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की नियमित मॉक ड्रिल से आपदा प्रबंधन तंत्र और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनता है। साथ ही विभागों की कार्यक्षमता का आकलन होने के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयारी भी सुनिश्चित होती है।

मॉक ड्रिल के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सरिता पवार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर सहित एनडीआरएफ, होमगार्ड, पीआरडी और अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।